01 May, 2015 बड़े संपादकों के छोटे सवाल किसी भी प्रजातंत्र में मीडिया का काम एक प्रहरी का होता है. वह सरकार का नहीं, जनता का पहरेदार होता है. मीडिया की ज़िम्मेदारी …
01 May, 2015 यह संसद के चेतने का समय है संसद को चेतना होगा. देश की सारी संस्थाओं पर विशेषकर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं. इन्हें सवालों के दायरे में आने …
01 May, 2015 संसद को जनता के गुस्से से डरना चाहिए राजा अभी कुछ महीनों पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री थे. अब सीबीआई की गिरफ्त में हैं, पहले रिमांड फिर जेल, ज़ाहिर है, ज़मानत पर …
01 May, 2015 सोनावणे की हत्या से उपजे सवाल क्या इस देश से ईमानदारी और वफ़ादारी का जनाज़ा ही उठ जाएगा? क्या भारत में ईमानदार अधिकारी पैदा होने ही बंद हो जाएंगे? स्थिति …
01 May, 2015 आतंकवादी मानवता के दुश्मन हैं हिंदू आतंकवाद, मुस्लिम आतंकवाद, संघ परिवार का आतंकवाद यह तीनों ही शब्द स्वामी असीमानंद के अपराध स्वीकारने के बाद से लगातार सुनने में आ …
01 May, 2015 महंगाई नव उदारवाद की देन है भारत पहली बार महंगाई की मार नहीं झेल रहा है. चाहे वह नेहरू का जमाना रहा हो या इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का …