21 September, 2015 अगर यह संपादकीय ग़लत है, तो हमें सच्चाई बताइए आज का संपादकीय संभवत: पूर्ण रूप से झूठ पर आधारित है. मैं चाहूंगा कि आप इस लेख में लिखी हुई सारी बातों को जांचें …
14 September, 2015 सार्थक राजनीतिक संवाद की ज़रूरत तीस वर्षों के भीतर भारत की राजनीति में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है. पहले नेता विचारों के आधार पर बनते थे. विचार थे, जो …
07 September, 2015 आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद के महान योद्धा हैं पत्रकारिता में अक्सर ऐसा होता है कि हम कुछ सुबूतों के आधार पर एक रिपोर्ट करते हैं, पर जब उसकी सच्चाई में जाते हैं, …
31 August, 2015 यह देशप्रेम नहीं, देशद्रोह है एक मजेदार स्थिति पैदा हो गई है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था से तो रिश्ता है, लेकिन उसका इस्तेमाल राजनीतिज्ञ अपने हक़ में करना चाहते …
24 August, 2015 मीडिया को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए अब आतंकवाद को लेकर बहस चल रही है और टाइगर मेमन का नाम किसी न किसी बहाने हमारे बीच आ रहा है. याकूब मेमन …
17 August, 2015 सर्वोच्च न्यायालय को अंतर्विरोधों का जवाब देना चाहिए हर व्यवस्था के अपने बंधन होते हैं, अपने सवाल होते हैं. अधिनायकवादी व्यवस्था में न्याय के ऊपर सवाल नहीं उठता. अधिनायकवादी व्यवस्था में अन्याय …