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राजनीतिक दलों से लोकलाज और नैतिकता की उम्मीद बेमानी है

वक्त, नैतिकता, नियम-कानून कैसे बदलते हैं, इसका प्रमाण और इसका मनोविज्ञान आज हमारे सामने है. आजादी के बाद देश के जितने नेता हुए, चाहे …

बहस से असल मुद्दा गायब है

किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल कभी बहुत गहरे दोस्त थे, लेकिन उस गहरी दोस्ती में भी एक प्रतिद्वंद्विता छिपी हुई थी. जब अन्ना हजारे …