23 May, 2017 वैचारिक बहस में शरीक हों, दुत्कारें नहीं पहले हमारे देश में वैचारिक मंथन बहुत होता था, जिसे शास्त्रार्थ का नाम दिया गया. दो परस्पर विचाराधाराएं आमने-सामने आती थीं. वहां तलवारें नहीं …