14
March,
2016
मैं जानता हूं कि सरकार के कान में अ़खबारों की लिखी बातें नहीं पहुंचतीं. जो निर्णय लेने वाले सज्जन हैं, वे टेलीविजन देखते हैं …
The blog subtitle
मैं जानता हूं कि सरकार के कान में अ़खबारों की लिखी बातें नहीं पहुंचतीं. जो निर्णय लेने वाले सज्जन हैं, वे टेलीविजन देखते हैं …
शब्दों का कैसा इस्तेमाल होना चाहिए, इसका आदर्श उदाहरण जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की घटना के बाद देश में देखने को मिल रहा है. …
मन में एक दुविधा है कि आ़िखर अपनी बात कहें, तो किससे कहें? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहें या वित्त मंत्री अरुण जेटली से …